मध्य प्रदेश 

नारायणगढ़ थाने के कोतवाल की जन्मकुंडली पहुंची नवागत जिला पुलिस कप्तान के पास,,,,

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नारायणगढ़ थाने के कोतवाल की जन्मकुंडली पहुंची नवागत जिला पुलिस कप्तान के पास,,,,

तस्करों से गठजोड़ और 37 कुंटल में मल्हारगढ़ टीआई को निपटाने के दोष का भी होगा निवारण,,,,,

मंदसौर/मंदसौर नीमच जिले में कई बार डोडा चूरा तस्करों और पुलिस की सांठगांठ के मामले सामने आते हैं जिसके बाद वरिष्ठ अधिकारी मामले को शांत करने के लिए जांच के आश्वासन भी देते हैं बाद में जांच ठंडे बस्ते में डालकर जनप्रतिनिधियों की रेंट पर उन्हीं दागी पुलिस कर्मचारियों की मलाईदार थानों पर पोस्टिंग कर दी जाती है जिससे आम जन में सरकार में बैठे जनप्रतिनिधियों के प्रति आक्रोश पनप ने के साथ ही जनप्रतिनिधियों की छवि खराब होती दिखाई देती है बीते दिनों 37 क्विंटल डोडा चुरा के मामले ने 23 विधानसभा चुनाव से पूर्व एक बार फिर मामले ने तूल पकड़ लिया है सोशल मीडिया पर चर्चा है कि पूर्व में 37 कुंटल डोडा चूरा के मामले में मल्हारगढ़ थाना प्रभारी को लाइन अटैच कर दिया गया था जबकि इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड नारायणगढ़ का कोतवाल है जिसकी भूमिका इस पूरे मामले में संदिग्ध है बावजूद अब तक जांच के नाम पर मामले को दबाया जा रहा है ॽ पूरे मामले में नारायणगढ़ कोतवाल के तार जुड़े होने के बावजूद जांच को ठंडे बस्ते में डालने के कारण सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर लगातार अवनीश को लेकर बाजार गर्म है नवागत जिला पुलिस कप्तान श्री अनुराग सुजानिया द्वारा मंदसौर का चार्ज लेते समय प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया से कहा था कि मैं कम बोलता हूं मेरा काम बोलता है मेरे रहते हुए किसी भी प्रकार के गलत काम बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे चाहे वह कोई भी हो ऐसे में अब ईमानदार कप्तान के पाले में 37 कुंटल का मामला पहुंचा है तो दूध का दूध और पानी का पानी होने की संभावना भी जताई जा रही है सोशल मीडिया के माध्यम से मामला कप्तान के संज्ञान में पहुंचा है तो कयास लगाए जा रहे हैं 37 कुंटल छिलके के मामले में कोतवाल का विकेट उड़ने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है इसी मामले में भरोसेमंद सूत्र बताते हैं कि यदि ईमानदारी से जांच हुई तो कोतवाल का बचना मुश्किल है बता दें कि मन्दसौर जिले में डोडाचूरा तस्करों से पुलिस की साठगांठ किसी से छुपी नही है सुत्रों कि माने तो पिछले दिनो नारायनगढ थाना क्षेत्र से 37 क्विंटल डोडा चूरा से लबालब ट्रक नारायणगढ सीमा से होकर मल्हारगढ आता है लेकिन नारायणगढ थाना क्षेत्र की सीमा में रात को गश्त में लगा पुलिस बल व अधिकारी को रात में ट्रक के लोकेशन आने पर वहां का एक कोतवाल गश्त व अन्य पुलिस कर्मियों को रोड पर जाने से मना कर देता है साथ ही किसी भी गाड़ी को चेक नहीं करने देता है ।उसके बाद वह ट्रक मल्हारगढ पहुँचती है तो पुलिस कर्मी ट्रक को रोकते है उसके बाद नारायनगढ से कोतवाल का फोन मल्हारगढ़ कोतवाल को जाता है उसके बाद कोतवाल अपनी जिम्मेदारी भूल जातें हैं उसके बाद पुलिसकर्मियों से ट्रक छोड़ने को कहा जाता है उसके बाद ट्रक मल्हारगढ़ से पार होता है मल्हारगढ़ से निकलने के बाद ट्रक को एनसीबी द्वारा पकड़ लिया जाता है एनसीबी द्वाराकेश बनाने के बाद नारायणगढ़ पुलिस ओर तस्करों से मिलीभगत उजागर होती हैं तत्कालीन एसपी ने मल्हारगढ़ टीआई को सस्पेंड किया उसके बाद जांच मल्हारगढ़ एसडीओपी त्रिलोकचंद पंवार को दी गई अब साहब ने क्या खेल किया की जांच की गति धीमी पड़ गई ये सवाल एसडीओपी त्रिलोकचंद पंवार से कप्तान के अलावा कौन पूछ सकता है सूत्रों के मुताबिक पुरे मामले में जाँच को सिर्फ जाँच रहने देने के लिए चढ़ावा चढ़ाया गया ताकी मामला रफादफा हो जाए उसके बाद जांच अब तक पूरी नही हुई जांच के ठंडे बसते में जाने से तस्करों के साथ मिटिंग करने वाले व उनकी खेप निकालने वाले के हौसले बुलंद है सो कप्तान को लगें हाथ नारायणगढ़ कोतवाल की जन्म कुंडली का तमाम दोष निकाल कर उन्हें भी दोष मुक्त कर देना चाहिए,,, ,,,,,,,

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